Sunday, July 9, 2017

पुरानी डायरी



पुरानी डायरी के पन्नों पर,
कुछ जज़्बात समेटे थे मैंने,
वक़्त की धुल को हटा कर,
देखा तो वह आज भी है हरे भरे

लफ़्ज़ों में जी भर कर पिरोये थे,
कुछ लम्हें, कुछ हसरतें,
कुछ उम्मीदें और कुछ ख़्वाब,
कुछ सीधे सादे से और कुछ सरफिरे

ज़िन्दगी जीने की जल्दबाज़ी में,
ज़रूरतों का सामान जुटाने में,
कुछ बिसरे, कुछ बिछड़ते गए,
और कुछ रह गए बस अधूरे

आज फिरसे पलटा है,
उन्हीं पन्नों को एकबार,
जीने को वही सारे ख़्वाब,
आज भी जो हैं गुज़रे कल से खरे


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