मैं नासमझ ही कितना भला था
जितना समझता जाता हूँ
उतना दूर होता जाता हूँ
ये फरेब ये मुखौटे ये झूठी चाहतें
ये दिल्लगी ये बेबसी को देख
खुद में ही सिमटता जाता हूँ
अपनेपन की तलाश लिए
अनजान लोगों की भीड़ में
खुद को तन्हा सा पाता हूँ
जितना समझता जाता हूँ
उतना दूर होता जाता हूँ
ये फरेब ये मुखौटे ये झूठी चाहतें
ये दिल्लगी ये बेबसी को देख
खुद में ही सिमटता जाता हूँ
अपनेपन की तलाश लिए
अनजान लोगों की भीड़ में
खुद को तन्हा सा पाता हूँ
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