Friday, June 9, 2017

दरकार नहीं

तेरे इश्क की मुझे दरकार नहीं
आज मैं कहती हूं मुझे प्यार नहीं
कभी तूने खेला था मेरे अश्कों के साथ
आज मैं कहती हूं इनसे सरोकार नहीं

लौट जाओ उन्हीं राहों में
जहां तन्हा छोड़ तुम आगे बड़े थे
मुझे टूटता हुआ देख कर भी
तुम कहां वहां रुके थे

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