तेरे इश्क की मुझे दरकार नहीं आज मैं कहती हूं मुझे प्यार नहीं कभी तूने खेला था मेरे अश्कों के साथ आज मैं कहती हूं इनसे सरोकार नहीं
लौट जाओ उन्हीं राहों में जहां तन्हा छोड़ तुम आगे बड़े थे मुझे टूटता हुआ देख कर भी तुम कहां वहां रुके थे
No comments:
Post a Comment