Friday, July 14, 2017

रफ़्ता रफ़्ता

रफ़्ता रफ़्ता ये शाम ढल जाएगी
जलती शमा सब बुझ जाएंगी
यह हसीं शाम ढलने से पहले
जलती शमाओं के बुझने से पहले
मैं कुछ वक़्त तेरे साथ गुज़ारना चाहती हूँ

बिखरे है हर तरफ रंग के मेले
कब तक चलूँ मैं यूँ अकेले
इन्ही रंगी मेलों के उठने  पहले
सोचा कोई साथी साथ में ले लें
दुआओं में तुझे मांगना चाहती हूँ

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